राजघाट पर समाधियों की परंपरा कैसे बदली? कांग्रेस सरकार की रोक से लेकर मोदी सरकार के नए फैसलों तक जानिए पूरा इतिहास

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How did the tradition of memorials at Rajghat change

नई दिल्ली। How did the tradition of memorials at Rajghat change, केंद्र में तत्कालीन सत्तासीन कांग्रेस के द्वारा 1999 में पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. शंकर दयाल शर्मा की समाधि 'कर्मभूमि' बनवाने के बाद राजघाट पर नई समाधियों के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी।

उस समय कहा गया था कि अतिविशिष्ट लोगों की समाधियों को लेकर एक प्रोटोकाॅल का पालन किया जाता है, उस लिहाज से राजघाट पर समाधि बनाने के लिए जगह नहीं बची है।

पीवी नरसिंहा राव की समाधि नहीं बनाई 

ऐसे में 2004 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहा राव की समाधि राजघाट पर नहीं बनाई जा सकी, जबकि उनके समर्थक और परिवार के लोग इसकी मांग कर रहे थे।

राजघाट पर 2013 में राष्ट्रीय स्मृति बनाने के कार्य काे मंजूरी दी गई थी और काम शुरू हुआ था। उस समय योजना बनाई गई थी कि राजघाट पर अंतिम संस्कार के बाद स्मृति स्थल पर बनाए गए बाॅक्स में संबंधित राष्ट्रीय नेता की याद में उनकी फाेटो के साथ स्मरण पट्टिका लगाई जाएगी।

मोदी सरकार ने लिया निर्णय 

2014 में केंद्र में मोदी सरकार आई तो राव की समाधि की मांग माेदी सरकार तक पहुंची, जिस पर उस समय के केंद्रीय शहरी विकास मंत्री उस समय एम. वेंकैया नायडू ने राजघाट का दाैरा कर स्थिति का निरीक्षण किया और इसके बाद मोदी सरकार ने फैसला लेकर समाधि बनाने की मंजूरी दी।

कब किसकी बनी समाधि

कांग्रेस के शासनकाल में बनी प्रमुख समाधियां-

नेता/व्यक्ति वर्ष समाधि स्थल
महात्मा गांधी 1948 राजघाट
जवाहरलाल नेहरू 1964 शांतिवन
लाल बहादुर शास्त्री 1966 विजय घाट
संजय गांधी 1980
इंदिरा गांधी 1984 शक्ति स्थल
जगजीवन राम 1986 समता स्थल
चौधरी चरण सिंह 1987 किसान घाट
राजीव गांधी 1991 वीर भूमि
ललिता शास्त्री 1993
ज्ञानी जैल सिंह 1994 एकता स्थल
शंकर दयाल शर्मा 1999 कर्मभूमि (कांग्रेस शासनकाल में बनी अंतिम समाधि)

भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में बनी प्रमुख समाधियां-

नेता/व्यक्ति वर्ष समाधि स्थल
पीवी नरसिंह राव 2015 ज्ञान भूमि (स्मारक बना)
अटल बिहारी वाजपेयी 2018 सदैव अटल
प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्मृति परिसर में समाधि निर्माण को स्वीकृति